Teri khamoshi agar -Sad Shayari

Teri khamoshi agar -Sad Shayari

Teri khamoshi agar

Teri khamoshi agar teri majburi hai to rehene de Ishq konsa jaruri hai

Hath Zakhmi hue to kuch apni hi khata thi. Lakiro ko mitana chaha kisi ko pane ke liye….

dil ki khamoshi pe kabhi mat jana ….rakh ke niche akshar aag dabi hoti hai.

Chalo acha hua ki dhund padne lagi varna dur tak takti reheti ye niganhe usko

Sachi mohabbat mai pyar mile ya na mile magar yad rakhne ke liye ek chehra jarur mil jata hai.

Muddonat se mangi fursat apne liye likin esa hoga socha na tha

kya hua agar dekh kar muh fer liya usne ..tasali hogyi abhi tak sakal ki pehechan baki hai.

Agar yakeen na ho to tum bichad kar dekh lo tum miloge sabhi se magar hamari talash mai.

Teri khamoshi agar teri majburi hai to rehene de Ishq konsa jaruri hai …hath Zakhmi hue to kuch apni hi khata thi.


तेरी खामोशी अगर तेरी मजबूरी है तो रहेने दे इश्क़ कोनसा जरूरी है हाथ जख्मी हुए तो कुछ अपनी ही खता थी |

लकीरों को मिटाना चाहा किसको को पाने के लिए …दिल की खामोशी पे कभी मत जाना.. राख के नीचे अक्सर आग दबी होती है ।

चलो अच्छा हुआ कि धुंध पड़ने लगी वरना दूर तक तकती रेहेती ये निगाहें उसको।

सच्ची मोहब्बत में प्यार मिले या ना मिले मगर याद रखने के लिए एक चेहरा जरूर मिल जाता है।

मुद्दत से मांगी थी फुरसत अपने लिए मगर ऐसे मिलेगी ये सोचा ना था |

क्या हुआ अगर देख कर मुंह फेर लिया उसने तसली हो गई अभी तक सकल की पहचान बाकी है

अगर यकीन ना हो तो बिछड़ कर देख लो तुम मिलोगे सभी से मगर हमारी तलाश में।  

तेरी खामोशी अगर तेरी मजबूरी है तो रहेने दे इश्क़ कोनसा जरूरी है हाथ जख्मी हुए तो कुछ अपनी ही खता थी |

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